2019 Only Modi !

Sharing following forward received via whatsapp. Its a pity that just for the sake of getting power, most of the opposition parties are using one or the other trick to defame Shree Narendra Modi ji. Read and decide whom India needs ! Good Governance or same divide and rule policy ! Can anyone count good deeds of UPA ????

 

मोदी…….. मोदी……. मोदी बड़ी असमंजस सी हो गयी है…! आखिर किसको वोट दिया जाये, किसको नहीं !बेरोजगारी का आलम ऐसा है कि सोचने पर BJP से भरोसा उठ जाता है। और देश के बारे में सोचते हैं तो दूसरी पार्टियों से भरोसा उठ जाता है। त्रिपुरा में BJP की जीत पर वंदेमातरम के नारे लगे। अररिया में राजद की जीत पर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे। बेरोजगारी बर्दाश्त है, लेकिन पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा बर्दाश्त नहीं होता है। कमियां हर सरकार में होती है, पर सारी देशद्रोही ताकतों को भाजपा से इतनी नफरत देख भाजपा के साथ खड़ा रहने का इरादा और पक्का हो जाता है। राज ठाकरे से लेकर राहुल गांधी तक,चंद्रबाबू से लेकर शरद बाबू तक, येचुरी से लेकर अब्दुल्ला तक, लालू से लेकर अखिलेश तक, मायावती से लेकर ममता बनर्जी तक! सब नेता एक आदमी को हराने को एक साथ खड़े हो गए हैं। कुछ तो जरूर सही किया है बंदे ने, तभी तो अपनी दुकान बचाने के चक्कर में पूरा बाजार ही रास्ते पर उतर आया है I

शिवसेना के अध्यक्ष कौन बने।
बालासाहेब का बेटा

अगले एनसीपी अध्यक्ष कौन होंगे?
शरद पवार बेटी या भतीजे।

आरजेडी का अगला अध्यक्ष कौन है?
लालू प्रसाद के बेटे I

समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष कौन हैं?
मुलायम सिंह का बेटा I

टीडीपी के अध्यक्ष कौन है?
चंद्र बाबू नायडू बेटा I

जेडीएस का अगला अध्यक्ष  कौन है?
देव गौड़ा के बेटे I

कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष कौन है?
सोनिया का बेटा राहुल I

टीएमसी का अगला अध्यक्ष  कौन है?
ममता के भतीजे

डीएमके का अगला अध्यक्ष  कौन है?
स्टालिन के बेटे

क्या कोई मुझे बता सकता है कि “भारतीय जनता पार्टी” के अगले अध्यक्ष कौन होंगे।

लेकिन क्या उपर्युक्त पार्टी में से कोई भी हमें BJP जैसा साहस दिखा सकता है?

नहीं

लेकिन पार्टी को अपनी परिवार की संपत्ति की तरह चलाने वाले देश मे उपदेश देते है कि वे लोकतंत्र के असली रक्षक हैं।

जनक जी की सभा में जब किसी राजा से अकेले धनुष नहीं उठा तो मूर्ख राजाओं ने महा गठबंधन करके संयुक्त रूप से धनुष पर जोर लगाया !

*भूप सहस दस एकहिं बारा.*
*लगे उठावन टरै न टारा।।*

इस कुप्रयास को देख कर किसी ने पूँछा…कि यदि धनुष टूट ही गया तो सीता जी तो एक ही हैं और आप हजारों हों , तो वर कौन होगा ??
राजा बोले – पहले धनुष तोड़ेंगे…. फिर हम सब आपस मे लड़ेंगे मरेंगे कटेंगे…..जो जिंदा बचेगा वही वर होगा !!
अब विचार आपको करना है कि, 2019 में किसकी सरकार आये और आप किसके साथ है I
अगर बात दिल को छू जाये तो मैसेज अपने जानने वालों को जरूर भेजे I

*2019 के लिए ऐसे ही मूर्खों का गठबंधन हो रहा है !!*

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Dutt Dashak in Gujarati

દત્ત  દશક

વભયહારક શ્રી હરિ  પ્રણમું વારંવાર

ન્મ મરણ ટાળી વિભો કરો શીઘ્ર ભવપાર

રેવાતટ વાસી નમું, વાસુદેવ યતિ રાય

દનમનોહર મૂર્તિ શી ! લાગુ પુનિ  પુનિ પાય

નાના રૂપે તું વસે,  નાના નામે એક,

ક્તજનોને કારણે ધારે વિધ વિધ ભેખ

ન્મ્યું નોહ્તું આ કશું હતો ત્યાહરે તુંજ

રેશે ના આ તોય તું હોઈશ સતચિતપુંજ

ન બાંધે મન છોડવે, રચ્યું મને આ સર્વ

નાના નેહ કે” કાંઠે શ્રુતિ, એક અનેકે શર્વ  

ત્ત કહે કોઈ તને, રામ કૃષ્ણ વળી કોક

દિનમણિ શિવ શક્ત્યાદિ તું, નામ રૂપ સહુ ફોક

ગઁગાયમુના સરસ્વતિ ભિન્ન નામ જે છેક

હુરૂપી બહુ નામ માં જલરૂપે સહુ એક  

સના નામ ભલે રટે  ચિત્ત લક્ષ્ય માં હોય,

વે  ભાવ થી ભવ મળે ભક્ત સ્વંય  ભવ હોય

ન્મ મરણ તેને નહિ,  સ્વંય જનાર્દન એહ

રેવા સાગર માં ભળ્યે, રહે ભિન્ન ક્યાં તેહ  

હાતપસ્વી  યોગીઓ, ભેદે ગોથાં ખાય

નાનાત્મઐક્ય જ્ઞાન થી, રંગ પર થઇ જાય  

દત્તદશક આ જે પઢે રાખી લક્ષ્યમાં ધ્યાન

દત્તકૃપા એ પર થઇ પામે નર નિર્વાણ  

Karunatripadi

Karunatripadi

।।श्रीकरुणात्रिपदी।।

शांत हो श्रीगुरुदत्ता। मम चित्ता शमवी आतां।।ध्रु०।।

तूं केवळ माता जनिता। सर्वथा तूं हितकर्ता।।

तूं आप्तस्वजन भ्राता। सर्वथा तूचि त्राता।।

(चाल) भयकर्ता तूं भयहर्ता। दंडधर्ता तूं परिपाता। तुजवाचुनि न दुजी वार्ता।

तूं आर्ता आश्रय दत्ता।। शांत हो श्रीगुरुदत्ता.. ।।१।।

अपराधास्तव गुरुनाथा। जरि दंडा धरिसी यथार्था।।

तरि आम्ही गाउनि गाथा। तव चरणीं नमवूं माथा।।

(चाल) तूं तथापि दंडिसी देवा। कोणाचा मग करूं धावा? सोडविता दुसरा तेव्हां।

कोण दत्ता आम्हां त्राता? शांत हो श्रीगुरुदत्ता.. ।।२।।

तूं नटसा होउनि कोपी। दंडितांहि आम्ही पापी।

पुनरपिही चुकत तथापि। आम्हांवरि नच संतापी।।

(चाल) गच्छतः स्खलनं क्वापि। असें मानुनि नच हो कोपी। निजकृपालेशा ओपी।

आम्हांवरि तूं भगवंता।। शांत हो श्रीगुरुदत्ता.. ।।३।।

तव पदरीं असता ताता। आडमार्गीं पाऊल पडतां।

सांभाळुनि मार्गावरता। आणिता न दूजा त्राता।

(चाल) निजबिरुदा आणुनि चित्ता। तूं पतीतपावन दत्ता। वळे आतां आम्हांवरता।

करुणाघन तूं गुरुनाथा।। शांत हो श्रीगुरुदत्ता.. ।।४।।

सहकुटुंब सहपरिवार। दास आम्ही हें घरदार।

तव पदी अर्पुं असार। संसाराहित हा भार।

(चाल) परिहरिसी करुणासिंधो। तूं दीनानाथ सुबंधो। आम्हां अघलेश न बाधो।

वासुदेव प्रार्थित दत्ता।। शांत हो श्रीगुरुदत्ता। मम चित्ता शमवी आतां।।५।।

2

श्रीगुरुदत्ता जय भगवंता। तें मन निष्ठुर न करी आता।।ध्रु०।।

चोरें द्विजासी मारीतां मन जें। कळवळलें तें कळवळो आतां।। श्रीगुरुदत्ता।।१।।

पोटशूळानें द्विज तडफडतां। कळवळलें तें कळवळो आतां।। श्रीगुरुदत्ता।।२।।

द्विजसुत मरता वळलें तें मन। हो कीं उदासीन न वळे आतां।। श्रीगुरुदत्ता।।३।।

सतिपति मरता काकुळती येतां। वळलें तें मन न वळे कीं आतां।। श्रीगुरुदत्ता।।४।।

श्रीगुरुदत्ता त्यजि निष्ठुरता। कोमल चित्ता वळवी आतां।। श्रीगुरुदत्ता।।५।।

3

जय करुणाघन निजजनजीवन। अनसूयानंदन पाहि जनार्दन।।ध्रु०।।

निजअपराधें उफराटी दृष्टी। होउनि पोटीं भय धरूं पावन।।१।।जय०।।

तूं करुणाकर कधीं आम्हांवर। रुसशी न किंकर-वरदकृपाघन।।२।।जय०।।

वारी अपराध तूं मायबाप। तव मनीं कोपलेश न वामन।।३।।जय०।।

बालकापराधा गणे जरी माता। तरी कोण त्राता देईल जीवन।।४।।जय०।।

प्रार्थी वासुदेव पदिं ठेवी भाव। पदीं देवो ठाव देव अत्रिनंदन।।५।।जय०।।

source: http://www.dattaganagapur.com/dattaganagapur_datafiles/contact.htm

महालक्ष्मि अष्टकम् :

महालक्ष्मि अष्टकम् :
 
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥१॥
नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि ।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥२॥
सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि ।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥३॥
सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।
मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥४॥
आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि ।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥५॥
स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे ।
महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥६॥
पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि ।
परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥७॥
श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते ।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥८॥
महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः ।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥९॥
एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥१०॥
त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।
महालक्ष्मिर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥११॥ 

सप्तश्‍लोकी दुर्गा

॥अथ सप्तश्‍लोकी दुर्गा॥

॥शिव उवाच॥

देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी।

कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः॥

॥देव्युवाच॥

श्रृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम्‌।

मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते॥

॥विनियोगः॥

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्‍लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः,

अनुष्टुप्‌ छन्दः, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः,

श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्‍लोकीदुर्गापाठे विनियोगः।

ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।

बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः

स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।

दारिद्र्‌यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या

सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।

सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।

भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रूष्टा तु कामान्‌ सकलानभीष्टान्‌।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्‍वरि।

एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्‌॥

इति श्रीसप्तश्‍लोकी दुर्गा सम्पूर्णा।

प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र !!

प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र !!

अस्य श्री प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र मन्त्रस्य सनत्कुमार ऋषि: स्वामी कार्तिकेयो देवता अनुष्टुप छन्द : मम सकल विद्या सिध्यर्थे , प्रज्ञा वृध्यर्थे प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र पारायणे विनियोग: !!

स्कन्द उवाच !!

योगिश्वरो महासेन: कार्तिकेयोग्नि नंदन: !

स्कन्द: कुमार सेनानी: स्वामी शंकर सम्भव: !!

गाँगेयस्ताम्र चूडश्च ब्रम्हचारी शिखिध्वज: !

तारकारी उमापुत्र क्रौंचारिश्च षडानन: !!

शब्दब्रम्ह समुद्रश्च सिद्ध सारस्वतों गुह: !

सनत्कुमारो भगवान भोगमोक्ष फलप्रद:!!

शरजन्मा गणाधीश पूर्वजो मुक्ति मार्ग कृत !

सर्वागम प्रणेताच वांच्छितार्थ प्रदर्शन : !!

अष्टाविंशति नामानि मदीयानीति य: पठेत !

प्रत्यूषं श्रद्धया युक्तो मूको वाचस्पति: भवेत् !!

महामंत्र मयानीति मम नामानु कीर्तनम् !

महाप्रज्ञा मवाप्नोति नात्रकार्या विचारणा !!

!! इति श्री रुद्रयामले प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्रं सम्पूर्णम  !!

चित्त स्थैर्य कर स्तोत्र !

! चित्त स्थैर्य कर स्तोत्र !

अनसूया त्रिसंभूत दत्तात्रेय महामते !

सर्वदेवधिदेव तवं मम चित्तं स्थिरीकुरु !!

शरणागतदीनार्त -तरकाखिलकारक

सर्वचालक देव तवं मम चित्तं स्थिरीकुरु !!

सर्वमङ्गलमांगल्य सर्वाधिव्याधिभेषज

सर्वसङ्कटहारिन तवं मम चित्तं स्थिरीकुरु !!

स्मर्तृरगामी स्वभक्तानां कामदोरिपुनाशन

भुक्तिमुक्तिप्रदः स तवं मम चित्तं स्थिरीकुरु !!

सर्वपापक्षयकर स्ताप दैन्यनिवारणः

योअभिष्टद : प्रभुः  तवं मम चित्तं स्थिरीकुरु !!

य एतत्प्रयः श्लोक-पंचकम प्रपठेत्सुधीः

स्थिरचित्त स भगवत्कृपापात्रम भविष्यति !!