Dutt Dashak in Gujarati

દત્ત  દશક

વભયહારક શ્રી હરિ  પ્રણમું વારંવાર

ન્મ મરણ ટાળી વિભો કરો શીઘ્ર ભવપાર

રેવાતટ વાસી નમું, વાસુદેવ યતિ રાય

દનમનોહર મૂર્તિ શી ! લાગુ પુનિ  પુનિ પાય

નાના રૂપે તું વસે,  નાના નામે એક,

ક્તજનોને કારણે ધારે વિધ વિધ ભેખ

ન્મ્યું નોહ્તું આ કશું હતો ત્યાહરે તુંજ

રેશે ના આ તોય તું હોઈશ સતચિતપુંજ

ન બાંધે મન છોડવે, રચ્યું મને આ સર્વ

નાના નેહ કે” કાંઠે શ્રુતિ, એક અનેકે શર્વ  

ત્ત કહે કોઈ તને, રામ કૃષ્ણ વળી કોક

દિનમણિ શિવ શક્ત્યાદિ તું, નામ રૂપ સહુ ફોક

ગઁગાયમુના સરસ્વતિ ભિન્ન નામ જે છેક

હુરૂપી બહુ નામ માં જલરૂપે સહુ એક  

સના નામ ભલે રટે  ચિત્ત લક્ષ્ય માં હોય,

વે  ભાવ થી ભવ મળે ભક્ત સ્વંય  ભવ હોય

ન્મ મરણ તેને નહિ,  સ્વંય જનાર્દન એહ

રેવા સાગર માં ભળ્યે, રહે ભિન્ન ક્યાં તેહ  

હાતપસ્વી  યોગીઓ, ભેદે ગોથાં ખાય

નાનાત્મઐક્ય જ્ઞાન થી, રંગ પર થઇ જાય  

દત્તદશક આ જે પઢે રાખી લક્ષ્યમાં ધ્યાન

દત્તકૃપા એ પર થઇ પામે નર નિર્વાણ  

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Karunatripadi

Karunatripadi

।।श्रीकरुणात्रिपदी।।

शांत हो श्रीगुरुदत्ता। मम चित्ता शमवी आतां।।ध्रु०।।

तूं केवळ माता जनिता। सर्वथा तूं हितकर्ता।।

तूं आप्तस्वजन भ्राता। सर्वथा तूचि त्राता।।

(चाल) भयकर्ता तूं भयहर्ता। दंडधर्ता तूं परिपाता। तुजवाचुनि न दुजी वार्ता।

तूं आर्ता आश्रय दत्ता।। शांत हो श्रीगुरुदत्ता.. ।।१।।

अपराधास्तव गुरुनाथा। जरि दंडा धरिसी यथार्था।।

तरि आम्ही गाउनि गाथा। तव चरणीं नमवूं माथा।।

(चाल) तूं तथापि दंडिसी देवा। कोणाचा मग करूं धावा? सोडविता दुसरा तेव्हां।

कोण दत्ता आम्हां त्राता? शांत हो श्रीगुरुदत्ता.. ।।२।।

तूं नटसा होउनि कोपी। दंडितांहि आम्ही पापी।

पुनरपिही चुकत तथापि। आम्हांवरि नच संतापी।।

(चाल) गच्छतः स्खलनं क्वापि। असें मानुनि नच हो कोपी। निजकृपालेशा ओपी।

आम्हांवरि तूं भगवंता।। शांत हो श्रीगुरुदत्ता.. ।।३।।

तव पदरीं असता ताता। आडमार्गीं पाऊल पडतां।

सांभाळुनि मार्गावरता। आणिता न दूजा त्राता।

(चाल) निजबिरुदा आणुनि चित्ता। तूं पतीतपावन दत्ता। वळे आतां आम्हांवरता।

करुणाघन तूं गुरुनाथा।। शांत हो श्रीगुरुदत्ता.. ।।४।।

सहकुटुंब सहपरिवार। दास आम्ही हें घरदार।

तव पदी अर्पुं असार। संसाराहित हा भार।

(चाल) परिहरिसी करुणासिंधो। तूं दीनानाथ सुबंधो। आम्हां अघलेश न बाधो।

वासुदेव प्रार्थित दत्ता।। शांत हो श्रीगुरुदत्ता। मम चित्ता शमवी आतां।।५।।

2

श्रीगुरुदत्ता जय भगवंता। तें मन निष्ठुर न करी आता।।ध्रु०।।

चोरें द्विजासी मारीतां मन जें। कळवळलें तें कळवळो आतां।। श्रीगुरुदत्ता।।१।।

पोटशूळानें द्विज तडफडतां। कळवळलें तें कळवळो आतां।। श्रीगुरुदत्ता।।२।।

द्विजसुत मरता वळलें तें मन। हो कीं उदासीन न वळे आतां।। श्रीगुरुदत्ता।।३।।

सतिपति मरता काकुळती येतां। वळलें तें मन न वळे कीं आतां।। श्रीगुरुदत्ता।।४।।

श्रीगुरुदत्ता त्यजि निष्ठुरता। कोमल चित्ता वळवी आतां।। श्रीगुरुदत्ता।।५।।

3

जय करुणाघन निजजनजीवन। अनसूयानंदन पाहि जनार्दन।।ध्रु०।।

निजअपराधें उफराटी दृष्टी। होउनि पोटीं भय धरूं पावन।।१।।जय०।।

तूं करुणाकर कधीं आम्हांवर। रुसशी न किंकर-वरदकृपाघन।।२।।जय०।।

वारी अपराध तूं मायबाप। तव मनीं कोपलेश न वामन।।३।।जय०।।

बालकापराधा गणे जरी माता। तरी कोण त्राता देईल जीवन।।४।।जय०।।

प्रार्थी वासुदेव पदिं ठेवी भाव। पदीं देवो ठाव देव अत्रिनंदन।।५।।जय०।।

source: http://www.dattaganagapur.com/dattaganagapur_datafiles/contact.htm

महालक्ष्मि अष्टकम् :

महालक्ष्मि अष्टकम् :
 
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥१॥
नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि ।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥२॥
सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि ।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥३॥
सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।
मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥४॥
आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि ।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥५॥
स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे ।
महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥६॥
पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि ।
परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥७॥
श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते ।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥८॥
महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः ।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥९॥
एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥१०॥
त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।
महालक्ष्मिर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥११॥ 

सप्तश्‍लोकी दुर्गा

॥अथ सप्तश्‍लोकी दुर्गा॥

॥शिव उवाच॥

देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी।

कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः॥

॥देव्युवाच॥

श्रृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम्‌।

मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते॥

॥विनियोगः॥

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्‍लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः,

अनुष्टुप्‌ छन्दः, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः,

श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्‍लोकीदुर्गापाठे विनियोगः।

ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।

बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः

स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।

दारिद्र्‌यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या

सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।

सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।

भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रूष्टा तु कामान्‌ सकलानभीष्टान्‌।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्‍वरि।

एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्‌॥

इति श्रीसप्तश्‍लोकी दुर्गा सम्पूर्णा।

प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र !!

प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र !!

अस्य श्री प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र मन्त्रस्य सनत्कुमार ऋषि: स्वामी कार्तिकेयो देवता अनुष्टुप छन्द : मम सकल विद्या सिध्यर्थे , प्रज्ञा वृध्यर्थे प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र पारायणे विनियोग: !!

स्कन्द उवाच !!

योगिश्वरो महासेन: कार्तिकेयोग्नि नंदन: !

स्कन्द: कुमार सेनानी: स्वामी शंकर सम्भव: !!

गाँगेयस्ताम्र चूडश्च ब्रम्हचारी शिखिध्वज: !

तारकारी उमापुत्र क्रौंचारिश्च षडानन: !!

शब्दब्रम्ह समुद्रश्च सिद्ध सारस्वतों गुह: !

सनत्कुमारो भगवान भोगमोक्ष फलप्रद:!!

शरजन्मा गणाधीश पूर्वजो मुक्ति मार्ग कृत !

सर्वागम प्रणेताच वांच्छितार्थ प्रदर्शन : !!

अष्टाविंशति नामानि मदीयानीति य: पठेत !

प्रत्यूषं श्रद्धया युक्तो मूको वाचस्पति: भवेत् !!

महामंत्र मयानीति मम नामानु कीर्तनम् !

महाप्रज्ञा मवाप्नोति नात्रकार्या विचारणा !!

!! इति श्री रुद्रयामले प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्रं सम्पूर्णम  !!

चित्त स्थैर्य कर स्तोत्र !

! चित्त स्थैर्य कर स्तोत्र !

अनसूया त्रिसंभूत दत्तात्रेय महामते !

सर्वदेवधिदेव तवं मम चित्तं स्थिरीकुरु !!

शरणागतदीनार्त -तरकाखिलकारक

सर्वचालक देव तवं मम चित्तं स्थिरीकुरु !!

सर्वमङ्गलमांगल्य सर्वाधिव्याधिभेषज

सर्वसङ्कटहारिन तवं मम चित्तं स्थिरीकुरु !!

स्मर्तृरगामी स्वभक्तानां कामदोरिपुनाशन

भुक्तिमुक्तिप्रदः स तवं मम चित्तं स्थिरीकुरु !!

सर्वपापक्षयकर स्ताप दैन्यनिवारणः

योअभिष्टद : प्रभुः  तवं मम चित्तं स्थिरीकुरु !!

य एतत्प्रयः श्लोक-पंचकम प्रपठेत्सुधीः

स्थिरचित्त स भगवत्कृपापात्रम भविष्यति !!

Positive impact – 4 years – Modi ji

I got following message on whatsapp, highly appreciate after reading it.  I hope people should again promote Shri Narendra Modiji as PM for 2019 also.

*शक्कर 45 से 31 हो गई, मिठाई खाओ*
*क्या पेट्रोल-डीजल को रो रहे हो.*.😢😭😢

*दालें 125 से 60 पर आ गई,*
*दाल तड़का खाओ,*
*क्या पेट्रोल-डीजल को रो रहे हो*😢😭😢

*4 साल पहले 2 लाख रुपये का इंश्योरैंस 5000/- से 6000/- में मिलता था, आज 330/- प्रति वर्ष में मिलता है, लेकिन पीना तो पेट्रोल है*😢😭😢

: *#सीमेंट की कीमत रुपये में – भारत 250;  नेपाल 600; बांग्लादेश 500; श्रीलंका 500 लेकिन पीना तो #पेट्रोल है!?*😢😭😢😭

*4 साल पहले 1000 Km के हवाई सफर का किराया ~5000/- था, आज 4 साल बाद लगभग 3400 है। लेकिन पीना तो पेट्रोल है*😢😭😢

*प्याज 45 से 8 हो गया,*
*ओनियन उत्तपम खाओ,*
*क्या पेट्रोल-डीजल को रो रहे हो.*.😢😭😢

*4 साल पहले जो LED बल्ब 400/- का मिलता था, आज वो 60/- का मिल रहा है, लेकिन पीना तो पेट्रोल है*😢😭😢

*4 साल पहले लाल चौक पे भारत माता जी जय बोलना गुनाह था आज उसी लाल चौक पे राम दरबार लगता है, लेकिन पीना तो पेट्रोल है*😢😭😢

*जब टमाटर 100रुपये किलो थे,*
*तब चिल्ला रहे थे टमाटर महंगे हैं।*
*अब 15 रुपये किलो है।*
*अब खरीद लो और बाकि 85रु बचे उसका पेट्रोल भरवा लो*
😄😜😜😝😝🤩🤩😛😛😝

*4 साल पहले रेलवे स्टेशन पर सीढ़ी पर चल कर जाना पड़ता था, आज एक्सीलेटर पर चढ़ कर जाते है, लेकिन पीना तो पेट्रोल है*😢😭😢
*4 साल पहले 9 सबसिडाइज़्ड LPG सिलिंडर मिलते थे, आज 12 मिलते हैं, लेकिन पीना तो पेट्रोल है*😢😭😢

*एक व्यक्ति 350 सांसदों को लेकर ,  आपके सामने आँसू बहाकर समर्थन माँग रहा और किस बात के लिये ., कालाधन खत्म करने के लिये ??*
*विश्व की तमाम राजधानी मे जाकर भारतवंशियों से सहायता माँग रहा ,16 से 20 घँटे काम कर रहा , होली , दीपावली , ईद , सैनिकों के बीच मना रहा हो❗*
*3 सालो से , हर रविवार आपकी छोटी – छोटी बातो पर बात कर रहा हैं .., ” जिसकी माँ 8’×10′ के कमरे मे और भाई किराना की दुकान चलाता हो ., क्या चाहते हैं आप ?? किस पैगम्बर की तलाश है ???*
*एक बात जान लीजिये .., यदि मोदी आंतकवाद , काला धन , भ्रष्टाचार नही खत्म कर पाये ., तो कोई माई का लाल कर भी नही पायेगा .., वहीँ जंतर – मन्तर पर कैंडल लेके चक्कर काटोगे❗*
*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे जीवन वाले व्यक्ति ने ., जिस अंदाज़ में सार्वजनिक मंच से कहा है ..,*
*कि ” ये लोग मुझे ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे …”*
*इससे यह स्पष्ट हो गया है कि .., स्थिति बहुत भयंकर और असहनीय रूप ले चुकी है …❗*
*एक अकेला व्यक्ति 125 करोड़ हिंदुस्तानियों के हिस्से का ज़हर .., ” नीलकण्ठ ” महादेव बनकर पी रहा है …❗*
*एक अकेला व्यक्ति देश के अंदर मौजूद सारे राक्षसों के साथ-साथ अनगिनत विदेशी दुश्मनों ( पाकिस्तान सरकार ,  पाकिस्तान की सेना , आई एस आई , दाऊद इब्राहिम , हाफिज सईद , चीन … ) के निशाने पर है … …*
*क्योंकि देश के इतिहास में पहली बार .., किसी अकेले आदमी ने इतने सारे दुश्मनों की एक साथ नींद हराम कर दी है …❗*
*ये अच्छाई और बुराई का महासंग्राम है , हम को तैयार रहना है और अपने प्रधान मंत्री का साथ देना है ., क्योंकि अगर इन सभी राक्षसों ने प्रधान मंत्री को अगर अपने चक्रव्यूह में फंसा लिया तो .., फिर सदियों तक कोई दूसरा ऐसा नेता पैदा नहीं होगा …❗*
*मैं हमारे प्रधानमंत्रीजी के साथ हूँ , क्या आप हो ??*
अगर हाँ तो MSG आगे बढाओ … ‼️
☺☺🙏🙏